पटना:नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मुलाकात करने पहुंचे परिजन बैठक के बाद काफी आक्रोशित नजर आए। डीजीपी से मिलने के बाद मृत छात्रा की मां और भाई ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उन्हें लगातार दबाव में रखने की कोशिश की जा रही है।
परिजनों का कहना है कि वे अपनी बेटी के लिए इंसाफ की उम्मीद लेकर डीजीपी से मिलने गए थे, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। छात्रा की मां भावुक होते हुए रो पड़ीं और कहा कि पुलिस इस मामले को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सवाल न पूछने और कुछ बातों को सार्वजनिक न करने के लिए उन पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है।
मृत छात्रा के भाई ने भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच की दिशा शुरू से ही संदिग्ध रही है। उनका आरोप है कि पुलिस केवल आत्महत्या के एंगल पर ही ध्यान केंद्रित कर रही है, जबकि परिवार लगातार हत्या या उत्पीड़न की आशंका जता रहा है। उन्होंने कहा कि कई अहम तथ्यों और सबूतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
परिजनों के अनुसार, जब वे अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं तो उन्हें चुप रहने की सलाह दी जाती है। छात्रा के भाई ने यह भी आरोप लगाया कि परिवार को बार-बार बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है, ताकि मामला जल्दी बंद किया जा सके। उन्होंने कहा, “हमारी बहन के साथ क्या हुआ, यह सच्चाई सामने आनी चाहिए, लेकिन हमें ही कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।”
इस बीच, परिजनों की नाराजगी को देखते हुए मामले ने और तूल पकड़ लिया है। छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी परिवार के आरोपों का समर्थन करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि परिजन खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तो यह जांच एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
हालांकि, पुलिस प्रशासन ने दबाव के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और कानूनी दायरे में की जा रही है तथा परिजनों से केवल सहयोग की अपेक्षा की जा रही है। पुलिस का दावा है कि किसी भी तरह का दबाव नहीं बनाया जा रहा।
फिलहाल, मामला संवेदनशील बना हुआ है और परिजनों का गुस्सा साफ तौर पर प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या मृत छात्रा के परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।



