पंकज कुमार
पटना, 8 मई | अपने सख्त प्रशासनिक रवैये और तेज कार्यशैली के लिए चर्चित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के.के. पाठक एक बार फिर बिहार प्रशासनिक व्यवस्था में सक्रिय नजर आए। बिहार दौरे के दौरान उन्होंने मुख्य सचिव और कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाईलेवल बैठक कर विभिन्न विभागों की योजनाओं, विकास कार्यों और लंबित मामलों की गहन समीक्षा की। बैठक में कामकाज की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि सभी लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए।
सूत्रों के अनुसार बैठक में शिक्षा, आधारभूत संरचना, प्रशासनिक सुधार, विकास योजनाओं और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। के.के. पाठक ने विभागवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट मांगी और कई मामलों में देरी को लेकर जवाब भी तलब किया।
बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित विभागों को 15 दिनों के भीतर जरूरी लंबित कार्यों को पूरा करने का टास्क दिया और तय समय सीमा के अंदर प्रगति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश जारी किया।
बताया जा रहा है कि बैठक में कई विभागों की धीमी कार्यप्रणाली और फाइलों के लंबित रहने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। के.के. पाठक ने अधिकारियों से कहा कि सरकार की योजनाओं का सीधा संबंध जनता से है, इसलिए काम में तेजी और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने और फील्ड स्तर पर मॉनिटरिंग बढ़ाने पर भी जोर दिया।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। के.के. पाठक का नाम बिहार में सख्त और परिणाम देने वाले अधिकारियों में गिना जाता है। इससे पहले भी उनकी कार्यशैली को लेकर कई बार चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में उनके बिहार दौरे और हाईलेवल समीक्षा बैठक को लेकर नौकरशाही में हलचल तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार अब विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और प्रशासनिक मशीनरी को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में सख्त कदम उठा रही है। यही वजह है कि विभागों को तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अधिकारियों को दिए गए 15 दिनों के अल्टीमेटम का जमीनी असर कितना दिखाई देता है और लंबित योजनाओं में कितनी तेजी आती है।




