द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 8 मई | बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने पटना पहुंचते ही अपराध और कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा और विवादित बयान दे दिया। राजधानी पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि “बिहार में अपराधियों का एक ही इलाज है — एनकाउंटर।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है और विपक्षी दलों ने इसे लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।
केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में अपराध की घटनाओं और कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। हाल के दिनों में राज्य में बढ़ते अपराध, गोलीबारी, लूट और हत्या की घटनाओं को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। इसी बीच सतीश चंद्र दुबे का यह सख्त बयान एनडीए सरकार के अपराध के खिलाफ ‘कठोर रुख’ के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पटना एयरपोर्ट पहुंचने के बाद पत्रकारों ने जब उनसे बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने बिना हिचक कहा कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है और “जो अपराध करेगा, उसे परिणाम भुगतना होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
केंद्रीय मंत्री के बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए सवाल उठाए। कई नेताओं ने कहा कि कानून अपने तरीके से काम करता है और किसी भी राज्य में ‘एनकाउंटर नीति’ को समाधान बताना गंभीर विषय है। वहीं भाजपा और एनडीए समर्थकों का कहना है कि जनता अपराध से परेशान है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में आगामी चुनावों को देखते हुए कानून-व्यवस्था का मुद्दा एक बड़ा चुनावी विषय बनता जा रहा है। ऐसे में नेताओं के तीखे बयान राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माने जा रहे हैं। सतीश चंद्र दुबे के बयान को भी उसी नजरिए से देखा जा रहा है, जहां अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की छवि बनाने की कोशिश दिखाई दे रही है।
बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करने वाला बयान मान रहे हैं। फिलहाल केंद्रीय मंत्री के इस बयान ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।




