आजादी के सात दशक बाद भी महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्य में हजारों लोग पीने योग्य पानी के लिए तरस रहे हैं। अकोला जिले के बालापुर, तेल्हारा और अकोट तहसील के सलाइन बेल्ट में स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। इन क्षेत्रों के 60 से अधिक गांवों के लोग खारे पानी का सेवन करने के लिए मजबूर हैं। इस पानी के सेवन से स्थानीय लोगों की किडनी पर गहरा असर पड़ रहा है और कई लोग किडनी फेल होने जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
इस क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता अत्यधिक खराब हो चुकी है। खारे पानी के कारण जलजनित बीमारियों के साथ-साथ किडनी की बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार खारा पानी पीने से किडनी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है और अंततः वह फेल हो सकती है। इस कारण कई परिवारों में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ चुकी हैं, जिससे लोग इलाज के लिए अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा इस समस्या को सुलझाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। इस इलाके के लोगों की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है, और उन्हें स्वच्छ पानी की आवश्यकता पहले से कहीं ज्यादा महसूस हो रही है। राज्य सरकार से मांग की जा रही है कि इस क्षेत्र में जल आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं ताकि लोगों को पीने योग्य पानी मिल सके और उनके स्वास्थ्य को बचाया जा सके।


