द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 14 मई : बिहार सरकार 16 मई को बेंगलुरु में आयोजित होने जा रहे PAN IIT Alumni India Bengaluru Summit 2026 में भाग लेने जा रही है। राज्य सरकार की यह भागीदारी बिहार में तकनीकी और नवाचार आधारित औद्योगिक विकास को गति देने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार का उद्देश्य उद्योग, निवेशकों, शोध संस्थानों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर बिहार को देश की उभरती डिजिटल और डीप-टेक अर्थव्यवस्था में मजबूत पहचान दिलाना है।
“कैटेलाइजिंग इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप एंड नेशन बिल्डिंग” थीम पर आधारित इस समिट में देश-विदेश से आईआईटी के पूर्व छात्र, स्टार्टअप संस्थापक, निवेशक, तकनीकी विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डीप-टेक, स्टार्टअप इकोसिस्टम और भविष्य के औद्योगिक अवसरों पर चर्चा होगी।
वित्त विभाग, बिहार सरकार की सचिव (व्यय) रचना पाटिल द्वारा जारी आधिकारिक संचार के अनुसार, इस सम्मेलन में भागीदारी को बिहार के प्रस्तावित “न्यू टेक हब” विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण माना है। इसका उद्देश्य सरकार, उद्योग, अकादमिक संस्थानों और निवेशकों के बीच सहयोग बढ़ाना है, ताकि बिहार में तकनीक आधारित निवेश और रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकें।
इस पहल के तहत रूहैल रंजन, अभिषेक आनंद तथा डॉ. प्रीतम कुमार को सम्मेलन में विभिन्न हितधारकों से संवाद के लिए नामित किया गया है। राज्य सरकार भविष्य में बिहार में भी पैन-आईआईटी एलुमनाई या तकनीक केंद्रित सम्मेलन आयोजित करने की संभावनाएं तलाश रही है, जिससे स्टार्टअप्स, उद्योगों और शोध संस्थानों के बीच सीधा संवाद बढ़ सके।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब बिहार सरकार ‘बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025’ के तहत राज्य के औद्योगिक ढांचे को विविध बनाने पर काम कर रही है। इस नीति के अंतर्गत सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, फूड प्रोसेसिंग और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। इनमें भूमि सहायता, पूंजी सब्सिडी, SGST प्रतिपूर्ति और रोजगार आधारित प्रोत्साहन शामिल हैं।
इस्लामपुर विधायक रूहैल रंजन ने कहा कि बिहार अब केवल प्रतिभा और श्रम शक्ति का स्रोत बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि राज्य के भीतर ही उद्योग, तकनीक और रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने के लिए उद्योगों, स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
वहीं, Indian Institute of Technology Patna के प्रोफेसर डॉ. प्रीतम कुमार ने कहा कि आईआईटी पटना में स्थापित किए जा रहे एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बिहार की डीप-टेक और शोध क्षमता को मजबूत करेंगे।
पैन आईआईटी एलुमनाई इंडिया के सचिव अशोक कुमार ने कहा कि आधुनिक निवेश केवल कम लागत या प्रोत्साहनों पर आधारित नहीं होता, बल्कि शोध क्षमता, कुशल मानव संसाधन और नीतिगत स्थिरता पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि बिहार अब तकनीक आधारित औद्योगिक विकास की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है, जो आने वाले समय में राज्य की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है।

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