द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 8 मई | बिहार की राजनीति में गुरुवार को बड़ा सियासी संदेश देखने को मिला, जब पटना के गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल का पूर्ण विस्तार किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कई केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी में भाजपा, जदयू, एलजेपीआर, हम और आरएलएम के कुल 32 मंत्रियों ने शपथ ली। इस कैबिनेट विस्तार को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एनडीए की बड़ी सामाजिक और राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
शपथ ग्रहण समारोह में सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की रही, जिन्होंने सबसे पहले मंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही बिहार की राजनीति में उनकी औपचारिक एंट्री हो गई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों और वोट बैंक को साधने की रणनीतिक कोशिश है।
नई कैबिनेट में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग को सबसे बड़ी हिस्सेदारी दी गई है। खुद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं, जबकि रामकृपाल यादव और विजेंद्र कुमार यादव जैसे नेताओं को शामिल कर यादव वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की गई है। अति पिछड़ा वर्ग से मदन सहनी, रमा निषाद और दामोदर रावत को जगह देकर मल्लाह, निषाद, कानू और धानुक समाज को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सरकार उनके प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दे रही है।
वैश्य समुदाय से दिलीप जायसवाल और केदार गुप्ता को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इसे व्यापारिक वर्ग और पिछड़ी जातियों के गठजोड़ को मजबूत बनाए रखने की रणनीति माना जा रहा है। वहीं दलित और महादलित समाज को साधने के लिए भी एनडीए ने खास ध्यान दिया है। एलजेपीआर से संजय पासवान, हम पार्टी से संतोष कुमार सुमन और जदयू से रत्नेश सदा जैसे नेताओं को मंत्री बनाकर विभिन्न दलित उपजातियों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है।
सवर्ण समाज को भी इस कैबिनेट में मजबूत हिस्सेदारी मिली है। भाजपा ने भूमिहार, ब्राह्मण और राजपूत समाज के नेताओं को प्रमुखता देकर अपने पारंपरिक वोट बैंक को साधने का प्रयास किया है। विजय कुमार सिन्हा, विजय कुमार चौधरी और ई. कुमार शैलेंद्र जैसे भूमिहार नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी गई है। वहीं ब्राह्मण समाज से नीतीश मिश्रा और मिथिलेश तिवारी को शामिल कर अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलन बनाया गया है। राजपूत समाज से लेसी सिंह, संजय टाइगर और अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज श्रेयसी सिंह को मंत्री बनाकर एनडीए ने बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार ने मिलकर इस कैबिनेट को पूरी तरह सामाजिक संतुलन के आधार पर तैयार किया है। मंत्रिमंडल में लगभग हर बड़े जातीय वर्ग को प्रतिनिधित्व देकर एनडीए ने यह संकेत दिया है कि आगामी चुनावों में उसकी रणनीति सामाजिक समीकरणों और व्यापक जनाधार पर केंद्रित रहेगी।
गांधी मैदान में आयोजित यह शपथ ग्रहण समारोह शक्ति प्रदर्शन में भी बदल गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोड शो और केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक घटना बना दिया। अब नई कैबिनेट के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना और सरकार की योजनाओं को तेजी से जमीन तक पहुंचाना होगी।




