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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एकजुटता दिखाना बहुत जरूरी : सुप्रिया सुले

सुप्रिया सुले ने कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एकजुटता दिखाना बहुत जरूरी होता है भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती। लोकसभा में बोलते…

Jul 30, 2025
2 min read
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एकजुटता दिखाना बहुत जरूरी : सुप्रिया सुले

Photo: The Media Times / Representative Image

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सुप्रिया सुले ने कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एकजुटता दिखाना बहुत जरूरी होता है भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती।
लोकसभा में बोलते हुए सुप्रिया सुले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और सहयोगात्मक भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” जैसी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मानवीय पहल के बाद प्रधानमंत्री ने न केवल एनडीए के नेताओं पर, बल्कि विपक्ष के कई सांसदों पर भी भरोसा जताया और उन्हें विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों का हिस्सा बनाया।

सुले ने इसे भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती बताते हुए कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एकजुटता दिखाना बहुत जरूरी होता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत राजनीतिक विचारों से ऊपर उठकर विपक्षी नेताओं को प्रतिनिधित्व का मौका देकर “राजनीतिक परिपक्वता” और “बड़प्पन” का परिचय दिया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (NCP-SP) की सांसद सुप्रिया सुले ने सोमवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘बड़प्पन’ की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री ने विपक्ष के कई नेताओं को विदेश दौरे पर जाने वाले प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व सौंपकर उन पर विश्वास जताया। सुप्रिया सुले ने इसे प्रधानमंत्री का उदार और सर्वदलीय रवैया बताया।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे समय में जब राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ रहा है, प्रधानमंत्री द्वारा विपक्षी नेताओं को जिम्मेदारियाँ सौंपना लोकतंत्र की परिपक्वता और सहिष्णुता का परिचायक है। सुले की इस टिप्पणी को सदन में कई सदस्यों ने सकारात्मक रूप से लिया।

सांसद सुप्रिया सुले ने संसद में यह भी कहा कि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर सरकार और विपक्ष को मिलकर चलना चाहिए। उन्होंने इस कदम को भारतीय राजनीति में सकारात्मक संवाद और सहयोग की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बताया।
इस बयान के बाद सदन में कई अन्य सांसदों ने भी इस भावना का समर्थन किया और विपक्ष व सरकार के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

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