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अघोरी बाबा और नागा साधु अघोरियों को लेकर सभी के मन में कई सवाल

द मीडिया टाइम्स डेस्क  प्रयागराज में आज महाकुंभ के गंगा स्नान का दूसरा दिन है. इस वक्त सुबह से ही श्रद्धालु स्नान के लिए घाट किनारे पहुंचे हुए हैं. महाकुंभ…

Jan 14, 2025
3 min read
अघोरी बाबा और नागा साधु अघोरियों को लेकर सभी के मन में कई सवाल

Photo: The Media Times / Representative Image

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द मीडिया टाइम्स डेस्क 

प्रयागराज में आज महाकुंभ के गंगा स्नान का दूसरा दिन है. इस वक्त सुबह से ही श्रद्धालु स्नान के लिए घाट किनारे पहुंचे हुए हैं. महाकुंभ में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं अघोरी बाबा और नागा साधु अघोरियों को लेकर सभी के मन में कई सवाल जरूर घूमते रहते हैं. जैसे कि ये लोग क्या सच में ही इंसानी मांस खाते हैं. क्यों अघोरी नर मुंड हमेशा अपने साथ रखते हैं और अघोरियों का अंतिम संस्कार (Aghori Last Rites) कौन करता है और कैसे होता है. आज हम आपको बताएंगे अघोरियों के बारे में कुछ रोचक बातें.

अघोरी के बारे में कहा जाता है कि वो धर्म की रक्षा के लिए सबसे आगे खड़ा नजर आएगा. कहते हैं कि अघोरी साधु की मृत्यु होती है तो उसके शव को जलाया नहीं जाता है. अघोरी साधु की मौत होने पर चौकड़ी लगाकर शव को उलटा रखा जाता है. मतलब सिर नीचे और टांगे ऊपर. फिर सवा माह (40 दिन) तक इंतजार किया जाता है कि उसके शव में कीड़े पड़ें.

उसके बाद मृत शरीर को वहां से निकालते हैं. आधे शरीर को वो लोग गंगा नदी में बहा देते हैं. जबकि, सिर को हिस्से को वो लोग साधना के लिए इस्तेमाल करते है. कुछ अघोरी सिर वाले हिस्से को साधना के बाद अपने पास ही रख लेते हैं तो कुछ उसे गंगा में बहा देते हैं. करने के पीछे मान्यता यह है कि गंगा में उसके सारे पाप धुल जाते हैं.माना जाता है कि यूं तो अघोरी साधु इंसान के मांस तक को नहीं छोड़ते, मगर वो गाय का मांस नहीं खाते. इसके अलावा बाकी सभी चीजों को खाते हैं. मानव मल से लेकर मुर्दे का मांस तक. अघोरपंथ में श्मशान साधना का विशेष महत्व है इसलिए वे श्मशान में रहना ही ज्यादा पंसद करते हैं. श्मशान में साधना करना शीघ्र ही फलदायक होता है.

अघोरियों की लाल आंखें

 

अघोरी हठ के पक्के होते हैं कहते हैं कि अघोरी हठधर्मी होते हैं. ये अगर किसी बात पर अड़ जाएं तो उसे पूरा किए बगैर करके ही मानते हैं. अघोरी साधु अपने गुस्सा को शांत करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. अधिकतर अघोरियों की आंखें लाल होती हैं. हालांकि आंखों की वजह से लगता है कि अघोरी हमेशा गुस्से में रहते हैं, मगर ये मन से काफी शांत होते हैं. आम लोगों से अघोरी सम्पर्क नहीं रखते. उनके साथ उनके शिष्य रहते हैं जो उनकी सेवा करते हैं. अघोरी भगवान शिव को मानते हैं और अपना जीवन उन्हीं के नाम समर्पित करते हैं

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