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Politics

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी दो साल से ज्यादा का वक्त बाकी, लेकिन सियासी हलचल तेज

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी दो साल से ज्यादा का वक्त बाकी है, लेकिन सियासी हलचल तेज हो गई है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम…

Mar 24, 2025
2 min read
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी दो साल से ज्यादा का वक्त बाकी, लेकिन सियासी हलचल तेज

Photo: The Media Times / Representative Image

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी दो साल से ज्यादा का वक्त बाकी है, लेकिन सियासी हलचल तेज हो गई है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) विपक्ष के हमलों से बचने के लिए खुद को तैयार कर रही है, वहीं विपक्षी दलों की कोशिशें भी तेज हो गई हैं कि वे भाजपा को घेरने के लिए क्या मुद्दे उठा सकते हैं। इस बीच, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने नए संकेत दिए हैं जो यूपी के राजनीतिक समीकरण को बदल सकते हैं।

कांग्रेस नेता और बाराबंकी से सांसद तनुज पुनिया ने हाल ही में यह दावा किया कि कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है और दलित वोट कांग्रेस के साथ जुड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी बसपा से गठबंधन की कोशिश कर रही है। हालांकि, बसपा की ओर से इस बयान पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे राजनीतिक पंडितों के बीच अटकलें तेज हो गई हैं। पुनिया ने यह भी बताया कि प्रियंका गांधी ने 2019 और 2022 में बसपा से गठबंधन की कोशिश की थी, लेकिन उस समय कोई सकारात्मक रिस्पॉन्स नहीं मिला था।

तनुज के इस बयान का बड़ा राजनीतिक मतलब निकाला जा रहा है। यह संकेत देता है कि कांग्रेस, सपा और बसपा के बीच एक बड़े गठबंधन का प्रयास कर रही है, जो यूपी में भाजपा को चुनौती देने के लिए जरूरी हो सकता है। हालांकि, यूपी की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस का गठबंधन फिलहाल मुश्किल नजर आता है, क्योंकि दोनों दलों के बीच पुरानी प्रतिद्वंद्विता रही है। इसके अलावा, सपा और बसपा के बीच भी बहुत मतभेद हैं, जो किसी गठबंधन की राह में रुकावट डाल सकते हैं।

लोकसभा चुनाव 2024 में बसपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था, वहीं कांग्रेस ने 6 सीटें जीती थीं और सपा ने 36 सीटें। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बसपा का वोट बैंक सपा और कांग्रेस के पक्ष में शिफ्ट हुआ है, जिसका सीधा नुकसान बसपा को हुआ। अब सवाल यह है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में बसपा, कांग्रेस और सपा एक साथ आएंगे, या फिर सपा प्रमुख अखिलेश यादव इस गठबंधन को मानने के लिए तैयार होंगे?

इस सब के बीच, यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तर प्रदेश में राजनीति के नए समीकरण कैसे बनते हैं, और क्या कांग्रेस अपनी रणनीतियों से भाजपा को चुनौती देने में सफल हो पाएगी।

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