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एआई अब हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है और इससे बचने के बजाय इसे समझने और सही तरीके से इस्तेमाल करने की जरूरत है।”

प्रसिद्ध गीतकार, पटकथा लेखक और विचारक जावेद अख्तर ने हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर जारी बहस को लेकर अपना नजरिया साझा किया। उन्होंने कहा कि एआई से जुड़ी…

Nov 11, 2025
2 min read
एआई अब हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है और इससे बचने के बजाय इसे समझने और सही तरीके से इस्तेमाल करने की जरूरत है।”

Photo: The Media Times / Representative Image

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प्रसिद्ध गीतकार, पटकथा लेखक और विचारक जावेद अख्तर ने हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर जारी बहस को लेकर अपना नजरिया साझा किया। उन्होंने कहा कि एआई से जुड़ी कई चिंताएं और डर “जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जा रहे हैं”।

जावेद अख्तर ने कहा हर नई तकनीक के आने पर लोगों को डर लगता है। जब बिजली आई थी, तब भी कुछ लोग इसके खिलाफ थे। लेकिन बदलाव को रोका नहीं जा सकता। एआई भी ऐसी ही चीज है — इसे नकारना या इससे भागना बेकार है। हमें इसे समझकर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि एआई इंसान की रचनात्मकता या सोच को पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकता।
रचनात्मकता इंसान की आत्मा में होती है। मशीनें पैटर्न सीख सकती हैं, लेकिन इंसानी जज्बात, अनुभव और संवेदनाएं दोहराई नहीं जा सकतीं,” उन्होंने कहा।जावेद अख्तर ने बताया कि तकनीक हमेशा से इंसान की प्रगति का हिस्सा रही है।
कविता लिखने वाला, संगीत रचने वाला या कहानी कहने वाला इंसान, अपनी कल्पना से काम करता है। एआई उसकी मदद कर सकता है, लेकिन उसे बदल नहीं सकता,” उन्होंने स्पष्ट किया।अगर आप इसे अपनाएंगे नहीं, तो दुनिया आपसे आगे निकल जाएगी,” अख्तर ने कहा।
उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे एआई से डरने की बजाय इसे सीखें और अपने काम में रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल करें।
युवाओं को इसे समझकर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।
यह बयान उन्होंने एक हालिया साक्षात्कार के दौरान दिया, जहां तकनीक और रचनात्मकता पर चर्चा हो रही थी।

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