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Bihar

एक माह के बाद खुला बड़ा राजनीतिक राज! क्यों नीतीश कुमार ने छोड़ी मुख्यमंत्री की कुर्सी

द मीडिया टाइम्स डेस्क पटना, 19 मई : बिहार की राजनीति में हुए सबसे बड़े सत्ता परिवर्तन को लेकर अब नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के…

May 19, 2026
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एक माह के बाद खुला बड़ा राजनीतिक राज! क्यों नीतीश कुमार ने छोड़ी मुख्यमंत्री की कुर्सी

Photo: The Media Times / Representative Image

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The Media Times
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द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 19 मई : बिहार की राजनीति में हुए सबसे बड़े सत्ता परिवर्तन को लेकर अब नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के करीब 25 दिनों बाद यह सवाल लगातार उठ रहा था कि आखिर नीतीश कुमार ने अचानक सत्ता की कुर्सी क्यों छोड़ दी। अब सत्ता गलियारों से जो जानकारी सामने आ रही है, उसने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

बताया जा रहा है कि यह फैसला किसी दबाव में नहीं बल्कि एनडीए की बड़ी राजनीतिक रणनीति के तहत लिया गया। लंबे समय तक बिहार की राजनीति का चेहरा रहे नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर सम्राट चौधरी को राज्य की कमान सौंप दी, जबकि खुद राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए राज्यसभा पहुंच गए।

सूत्रों के अनुसार, भाजपा बिहार में नए नेतृत्व को आगे बढ़ाना चाहती थी। पार्टी आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में नई पीढ़ी के नेतृत्व को स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही थी। इसी कड़ी में सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया गया। माना जा रहा है कि पिछड़ा वर्ग और युवा नेतृत्व के चेहरे के तौर पर उन्हें आगे कर भाजपा और एनडीए बड़ा सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार अब दिल्ली की राजनीति में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। राज्यसभा जाने के पीछे भी यही रणनीति बताई जा रही है। एनडीए नेतृत्व चाहता है कि केंद्र की राजनीति में नीतीश कुमार का अनुभव और राजनीतिक पकड़ गठबंधन को मजबूत करे।

हालांकि विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। राजद ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने धीरे-धीरे जदयू की राजनीतिक ताकत कमजोर कर दी और अंततः नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। विपक्ष इसे “सत्ता की स्क्रिप्टेड रणनीति” बता रहा है।

वहीं जदयू नेताओं का दावा है कि यह बदलाव पूरी तरह योजनाबद्ध और विकास केंद्रित फैसला है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, नीतीश कुमार ने बिहार को नई दिशा देने और राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की आवाज को मजबूत करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया।

इधर सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार की राजनीति में नई सक्रियता दिखाई दे रही है। सरकार लगातार विकास, निवेश और प्रशासनिक सुधारों को लेकर बड़े फैसले ले रही है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले चुनावों में यह नेतृत्व परिवर्तन एनडीए को कितना राजनीतिक फायदा पहुंचाता है।

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