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जनजातीय गौरव दिवस को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी 15 नवंबर को डेडियापाड़ा में याहामोगी माता के दर्शन करेंगे“

आज की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को डेडियापाड़ा (नर्मदा–गुजरात) स्थित देवमोगरा धाम में अस्तित्वमान याहा पांडोरी माता के दर्शन करेंगे। यह अवसर इस वर्ष के राष्ट्रीय…

Nov 14, 2025
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जनजातीय गौरव दिवस को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी 15 नवंबर को डेडियापाड़ा में याहामोगी माता के दर्शन करेंगे“

Photo: The Media Times / Representative Image

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आज की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को डेडियापाड़ा (नर्मदा–गुजरात) स्थित देवमोगरा धाम में अस्तित्वमान याहा पांडोरी माता के दर्शन करेंगे। यह अवसर इस वर्ष के राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के अंतर्गत मनाया जा रहा है और साथ ही यह दिन स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती से भी मेल खाता है।
जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन आदिवासी समाज की गौरवशाली परंपराओं, संस्कृति तथा उनके योगदान को राष्ट्रीय मंच पर मान्यता प्रदान करने के लिए किया जाता है। इस साल यह मुख्य आयोजन गुजरात के नर्मदा जिले में किया जा रहा है।
—बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर ऐसे धार्मिक–सांस्कृतिक केंद्र में प्रधानमंत्री का दौरा आदिवासी समाज के प्रति सम्मान एवं संवेदनशीलता का प्रतीक माना जा रहा है।
देवमोगरा धाम प्राकृतिक सौन्दर्य से भरी सतपुड़ा पर्वतमाला के बीच स्थित है, जहाँ याहा पांडोरी माता को आदिवासी समाज की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है।

कथा के अनुसार, किसी पुराने अन्न–जल संकट की घड़ी में माता ने स्वयं कणी-कंसरी रूप धारण कर अन्न वितरण शुरू किया था; तभी से माना जाता है कि इस धाम में अन्न के भण्डार कभी खाली नहीं होते।

हर वर्ष माघ महीने की अमावस्या तथा महाशिवरात्रि के पूर्व पांच दिनों तक इस धाम में भव्य मेला होता है, जिसमें जंगलों-पर्वतों के बीच माँ की पूजा और प्राकृतिक झरने में स्नान करने जैसी परंपराएं शामिल हैं।
आदिवासी परंपराओं के अनुरूप यहाँ नई फसल के उपलक्ष्य में पूजा-अर्चना, लकड़ी-टोकरी में धान समर्पित करना, लोकगीत-नृत्य व वाद्ययंत्रों के साथ होब यात्रा जैसी गतिविधियाँ आयोजित होती हैं।
इस दिन धाम में जनजातीय समुदायों के लिए विशेष कार्यक्रम होंगे, जिसमें उनकी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, आदिवासी परिधान, नृत्य-गीत व लोकविरासत को स्थान मिलेगा।

सुरक्षा व व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं, ताकि बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों को सुचारु रूप से अवसर मिल सके।

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