पटना, 9 मई : बिहार की नई सरकार में शुक्रवार को एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश देखने को मिला, जब जेडीयू नेता निशांत कुमार ने औपचारिक रूप से स्वास्थ्य मंत्री का पदभार संभाल लिया। पटना स्थित स्वास्थ्य विभाग कार्यालय में पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने साफ कहा कि उनकी प्राथमिकता बिहार के हर व्यक्ति तक बेहतर इलाज और मजबूत स्वास्थ्य सुविधा पहुँचाना है। सम्राट चौधरी सरकार के कैबिनेट विस्तार के अगले ही दिन उनकी सक्रियता ने यह संकेत दे दिया कि नई सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर तेजी से काम करना चाहती है।
स्वास्थ्य मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद निशांत कुमार ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की और अस्पतालों की स्थिति, दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों की कमी और मरीजों की सुविधाओं को लेकर जानकारी ली। उन्होंने कहा कि बिहार के सरकारी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था को मजबूत करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाए।
निशांत कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करेंगे। उन्होंने कहा कि बिहार की बढ़ती आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देना सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग में जवाबदेही तय की जाएगी ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
निशांत कुमार के स्वास्थ्य मंत्री बनने को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद पहली बार नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सरकार में इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है। इसे जेडीयू के भीतर नई पीढ़ी के नेतृत्व के रूप में भी देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि आने वाले समय में निशांत कुमार बिहार की राजनीति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि नीतीश कुमार ने करीब 21 वर्षों तक अपने बेटे को राजनीति से दूर रखा, लेकिन अब पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मांग पर उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा है। उन्होंने भरोसा जताया कि निशांत कुमार के नेतृत्व में बिहार का स्वास्थ्य विभाग नई दिशा में आगे बढ़ेगा और आम लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी।
बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था लंबे समय से डॉक्टरों की कमी, अस्पतालों में संसाधनों की कमी और मरीजों की बढ़ती संख्या जैसी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में अब सभी की नजर नए स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पर टिकी है कि वह इन चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और क्या सच में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर बदल पाएंगे।




