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Bihar

बंगाल में भगवा लहर के बाद पटना भाजपा कार्यालय में जश्न, ‘झालमुड़ी’ से लेकर आतिशबाजी तक सियासी उत्सव

द मीडिया टाइम्स डेस्क पटना, 4 मई । पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद देशभर में सियासी माहौल गरम है, और इसकी गूंज पटना तक…

May 5, 2026
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बंगाल में भगवा लहर के बाद पटना भाजपा कार्यालय में जश्न, ‘झालमुड़ी’ से लेकर आतिशबाजी तक सियासी उत्सव

Photo: The Media Times / Representative Image

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The Media Times
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द मीडिया टाइम्स डेस्क

पटना, 4 मई । पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद देशभर में सियासी माहौल गरम है, और इसकी गूंज पटना तक साफ सुनाई दी। पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने जोरदार जश्न मनाया—मिठाइयाँ बंटी, झालमुड़ी परोसी गई और आतिशबाजी के साथ “कमल खिलने” का उत्सव मनाया गया।

दरअसल, 2026 विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार पश्चिम बंगाल में स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए राजनीतिक इतिहास रच दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार पार्टी 200 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करने की ओर बढ़ी, जो राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

इसी जीत की खबर जैसे ही सामने आई, पटना भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। ढोल-नगाड़ों के बीच कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और “भारत माता की जय” व “जय श्रीराम” के नारों से माहौल गूंज उठा। खास बात यह रही कि बंगाल की पहचान मानी जाने वाली ‘झालमुड़ी’ बांटकर इस जीत को सांस्कृतिक अंदाज में भी मनाया गया—एक तरह से यह जीत का राजनीतिक और प्रतीकात्मक प्रदर्शन था।

पार्टी नेताओं ने इसे सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि “राजनीतिक बदलाव का संकेत” बताया। उनका कहना है कि बंगाल की जनता ने वर्षों पुरानी राजनीति को नकारते हुए विकास और नए नेतृत्व पर भरोसा जताया है। वहीं विपक्ष इसे लेकर सवाल भी उठा रहा है, जिससे यह जीत और ज्यादा विवादों के घेरे में आ गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह जीत सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वी भारत में भाजपा के तेजी से बढ़ते प्रभाव का संकेत है। असम में सत्ता बरकरार रखना और पुडुचेरी में बढ़त हासिल करना इस राजनीतिक विस्तार को और मजबूत करता है।

पटना में जश्न का यह दृश्य साफ बताता है कि यह जीत सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं रही—यह राष्ट्रीय राजनीति के बड़े समीकरणों को भी बदलने वाली घटना बन चुकी है। बिहार भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए यह “मनोबल बढ़ाने वाला क्षण” है, वहीं विपक्ष के लिए एक नई चुनौती।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है—क्या देश की राजनीति अब पूरी तरह एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है?

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