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बिहार में ‘ब्यूरोक्रेसी सर्जरी’: 11 IAS अधिकारियों के तबादले से सत्ता गलियारों में हलचल, क्या बड़े बदलाव की तैयारी में सरकार?

द मीडिया टाइम्स डेस्क पटना, 11 मई | बिहार सरकार ने रविवार को प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा फेरबदल करते हुए 11 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के विभाग बदल दिए। सामान्य प्रशासन…

May 11, 2026
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बिहार में ‘ब्यूरोक्रेसी सर्जरी’: 11 IAS अधिकारियों के तबादले से सत्ता गलियारों में हलचल, क्या बड़े बदलाव की तैयारी में सरकार?

Photo: The Media Times / Representative Image

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The Media Times
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द मीडिया टाइम्स डेस्क

पटना, 11 मई |
बिहार सरकार ने रविवार को प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा फेरबदल करते हुए 11 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के विभाग बदल दिए। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सरकार ने वित्त, स्वास्थ्य, ऊर्जा, जल संसाधन, पर्यटन और आपदा प्रबंधन जैसे अहम विभागों में नई जिम्मेदारियां देकर साफ संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर बड़े फैसले और तेज कामकाज देखने को मिल सकता है।

राजनीतिक और प्रशासनिक जानकार इस फेरबदल को केवल रूटीन ट्रांसफर नहीं मान रहे हैं। माना जा रहा है कि नई सरकार अब अपने हिसाब से प्रशासनिक टीम तैयार करने में जुट गई है। खास बात यह है कि जिन विभागों में जनता की सीधी नाराजगी और शिकायतें सबसे ज्यादा थीं, उन्हीं विभागों में बड़े बदलाव किए गए हैं। स्वास्थ्य, वित्त और आपदा प्रबंधन जैसे विभागों में नए चेहरों की एंट्री को सरकार की “परफॉर्मेंस लाइन” से जोड़कर देखा जा रहा है।

सबसे चर्चित बदलाव वित्त विभाग में हुआ है। 2007 बैच के आईएएस अधिकारी संजय कुमार सिंह को वित्त विभाग का सचिव बनाया गया है। इससे पहले यह जिम्मेदारी अतिरिक्त प्रभार के तौर पर आनंद किशोर के पास थी। सरकार ने अब वित्त विभाग को पूर्णकालिक नेतृत्व देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि आर्थिक फैसलों और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाएगी। संजय कुमार सिंह मुख्यमंत्री सचिवालय और वाणिज्य कर विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे। प्रशासनिक हलकों में इसे “डबल ट्रस्ट मॉडल” कहा जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग में भी बड़ा बदलाव किया गया है। 2005 बैच के अधिकारी कुमार रवि को स्वास्थ्य विभाग का नया सचिव बनाया गया है। उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय से हटाकर सीधे स्वास्थ्य विभाग भेजा गया है। ऐसे समय में जब बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में रही है, यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है। हाल के दिनों में अस्पतालों की स्थिति, दवा आपूर्ति, डॉक्टरों की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार पर विपक्ष लगातार हमलावर रहा है। ऐसे में कुमार रवि की तैनाती को “सिस्टम सुधार मिशन” के तौर पर देखा जा रहा है।

जल संसाधन विभाग में चंद्रशेखर सिंह की एंट्री भी कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बिहार हर साल बाढ़ और जल प्रबंधन की समस्याओं से जूझता है। ऐसे में मानसून से पहले विभाग में नई तैनाती को सरकार की रणनीतिक तैयारी माना जा रहा है। वहीं 1997 बैच के वरिष्ठ अधिकारी संतोष कुमार मल्ल को आपदा प्रबंधन विभाग का प्रधान सचिव बनाना भी आगामी मौसम और आपदा प्रबंधन की चुनौतियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

ऊर्जा विभाग में अजय यादव को सचिव बनाया गया है। उन्हें बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के सीएमडी का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। बिहार में बिजली आपूर्ति और स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन को लेकर सरकार लगातार बड़े दावे करती रही है। ऐसे में ऊर्जा विभाग में यह बदलाव आने वाले समय में बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार की प्राथमिकता को दिखाता है।

दिल्ली स्थित बिहार भवन में भी बदलाव हुआ है। मनोज कुमार सिंह को नया स्थानिक आयुक्त बनाया गया है। उन्हें मुंबई निवेश आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। इसे बिहार सरकार के निवेश और बाहरी संपर्क को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। वहीं भवन निर्माण विभाग, समाज कल्याण विभाग और कारा सुधार सेवाओं में भी नए अधिकारियों की तैनाती की गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फेरबदल केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार की नई कार्यशैली का संकेत है। नई टीम के जरिए सरकार तेज फैसले, बेहतर निगरानी और योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन को मजबूत करना चाहती है। हालांकि विपक्ष इसे “अंदरूनी असंतोष और प्रशासनिक दबाव” से जोड़कर भी देख रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन बदलावों से बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में वास्तविक सुधार देखने को मिलेगा, या फिर यह फेरबदल भी फाइलों तक सीमित रह जाएगा। फिलहाल इतना तय है कि बिहार की नौकरशाही में हुए इस बड़े बदलाव ने सत्ता गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

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