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महाकुंभ में कोई भेदभाव नहीं: योगी आदित्यनाथ का एकता का संदेश

प्रयागराज में जारी महाकुंभ को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एकता और समरसता का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल भारत बल्कि पूरी…

Jan 26, 2025
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महाकुंभ में कोई भेदभाव नहीं: योगी आदित्यनाथ का एकता का संदेश

Photo: The Media Times / Representative Image

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प्रयागराज में जारी महाकुंभ को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एकता और समरसता का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए सनातन धर्म की महानता को प्रदर्शित कर रहा है। योगी आदित्यनाथ ने मीडिया की सराहना करते हुए कहा कि उसने महाकुंभ के वास्तविक संदेश को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

लखनऊ में महाकुंभ संवाद कार्यक्रम के दौरान एनडीटीवी के प्रधान संपादक संजय पुगलिया से बातचीत में योगी आदित्यनाथ ने कहा, “हर कोई संगम में स्नान करना चाहता है। मैं चाहता हूं कि लोग स्वयं आकर देखें। मीडिया ने इस संदेश को दुनिया तक पहुंचाने में सकारात्मक भूमिका निभाई है।”

मुख्यमंत्री ने महाकुंभ को ‘महा पर्व’ करार देते हुए कहा कि इस आयोजन ने समाज में एकता और समरसता का संदेश दिया है। “14 जनवरी को करीब छह करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। यह महाकुंभ का संदेश है कि यहां कोई भेदभाव नहीं है। जो लोग पहले सनातन धर्म की आलोचना करते थे, वे भी आज इसे देखने आ रहे हैं,” उन्होंने कहा।

योगी आदित्यनाथ ने इस आयोजन में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की आस्था को महत्व देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य उन लोगों के साथ काम करना है जो सनातन धर्म में विश्वास रखते हैं।

महाकुंभ के सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या से पहले प्रयागराज में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। 29 जनवरी को होने वाले इस प्रमुख स्नान के लिए लाखों लोग पहले ही शहर में पहुंच चुके हैं। रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, जो संगम में पुण्य लाभ के लिए आतुर हैं।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महाकुंभ क्षेत्र को पूरी तरह ‘नो-व्हीकल ज़ोन’ घोषित किया गया है। भीड़ प्रबंधन के लिए नदी किनारे बैरिकेडिंग की जा रही है, जिससे सुचारू रूप से स्नान संपन्न हो सके।

सभी सेक्टरों और ज़ोन में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। अमृत स्नान के दौरान कोई विशेष प्रोटोकॉल लागू नहीं होगा, जिससे आम भक्तों को प्राथमिकता दी जा सके और उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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