नई दिल्ली: भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के एक पुराने बयान ने एक बार फिर सियासी पारा चढ़ा दिया है। इस बयान में माल्या ने दावा किया था कि वह 2016 में भारत छोड़ने से पहले तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिला था और उन्हें इसकी जानकारी दी थी। कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला।
कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि यदि माल्या का यह दावा सही है, तो यह साफ दर्शाता है कि सरकार की मिलीभगत से ही वह देश छोड़कर भागा। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा तंज कसते हुए कहा, “नरेंद्र का पूरा सिस्टम ही सरेंडर निकला।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार को पहले से जानकारी थी, तो फिर माल्या को भागने से क्यों नहीं रोका गया?
कांग्रेस ने यह भी कहा कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति के भागने का नहीं, बल्कि सरकार की नीयत और प्रशासनिक नाकामी का प्रतीक है। अगर देश का वित्त मंत्री ही एक भगोड़े की जानकारी के बावजूद उसे जाने दे, तो फिर जनता किससे उम्मीद रखे?
इस पूरे घटनाक्रम ने मोदी सरकार की पारदर्शिता और कथित भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने मांग की है कि इस मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए।
कांग्रेस ने इसे “भ्रष्टाचार पर चुप्पी की साजिश” करार देते हुए जनता से अपील की कि वो इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगे।




