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यदि रूस से भारत को तेल की आपूर्ति में कमी आती है, तो भारत के पास कई विकल्प हैं

मध्य पूर्व एवं पश्चिमी अफ्रीका से तेल आयातसरकारी रिफाइनरियों (IOC, BPCL, HPCL, MRPL) ने अगस्त प्रारंभ में रूस से नई ख़रीदारी रोक दी है, और अब उन्होंने नॉन-रूसी स्रोतों—जैसे अबू…

Aug 6, 2025
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यदि रूस से भारत को तेल की आपूर्ति में कमी आती है, तो भारत के पास कई विकल्प हैं

Photo: The Media Times / Representative Image

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मध्य पूर्व एवं पश्चिमी अफ्रीका से तेल आयातसरकारी रिफाइनरियों (IOC, BPCL, HPCL, MRPL) ने अगस्त प्रारंभ में रूस से नई ख़रीदारी रोक दी है, और अब उन्होंने नॉन-रूसी स्रोतों—जैसे अबू धाबी का मर्बन क्रूड और पश्चिमी अफ्रीका के तेल—की ओर रुख किया है ।अमेरिका, कनाडा, ब्राजील सहित नए सप्लायरIOC ने हाल ही में 70 लाख बैरल तेल खरीदा है: 45 लाख अमेरिका, 20 लाख अबू धाबी (Das crude), और 5 लाख कनाडा से ।
इसके अतिरिक्त, भारत ने ब्राजील और कनाडा से भी तेल आयात में वृद्धि की है, और गुयाना जैसे छोटे आपूर्तिकर्ताओं को भी शामिल किया है ।तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया है कि भारत ने घरेलू खोज और उत्खनन गतिविधियों को तेज किया है, जिससे आयात निर्भरता कम हो सके ।रूसी तेल पर मिलने वाले भारी डिस्काउंट जैसे $5–10 प्रति बैरल कम रहना अब लगभग खत्म हो चुका है। इससे विस्तारित स्रोतों से आने वाला तेल महंगा होगा, जिससे भारत की आयात लागत बढ़ सकती है ।

अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी के तहत, रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता था—and पहले हिस्सों के लिए 25% टैरिफ लागू किया गया है ।
भारत ने कहा कि यह निर्णय उसके आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है ।विश्लेषकों की राय है कि ऐसे टैरिफ और सप्लाई चेंज से भारत का मुद्रास्फीति नियंत्रण और निर्यात प्रभावित हो सकते हैं। ट्रंप की घोषणा के परिणामस्वरूप भारत को यूएस निर्यात में $18 बिलियन तक झटका और तेल संबंधित लागत में $11 बिलियन तक वृद्धि हो सकती है ।Nomura के हिसाब से GDP वृद्धि अनुमान में केवल 0.2‑0.3% की गिरावट हो सकती है, जिससे भारत की 6.2% वृद्धि दर थोड़ी प्रभावित हो सकती है ।मिडल ईस्ट (अबू धाबी) मर्बन, Das crude तुलनात्मक महंगा, पर भरोसेमंद आपूर्तिपश्चिमी अफ्रीका विभिन्न ग्रेड्स विकल्प, लेकिन सीमित मात्राअमेरिका, कनाडा, ब्राजील WCS, ब्राज़ील इत्यादि अधिक महंगा, पर विविधता बढ़ी

घरेलू तेल उत्पादन भारत के तेल क्षेत्रों आयात कम होंगे, दीर्घकालिक लाभभारत ने स्पष्ट किया है कि उसे किसी बाहरी दबाव के तहत अपनी ऊर्जा सुरक्षा नीति नहीं बदलनी, और अमेरिका के बढ़ते दबाव को दृढ़ता से जवाब दिया ।रूस की प्रतिक्रिया: रूस ने भी संकेत दिए हैं कि वह अमेरिका के टैरिफ धमकी का जवाब दे सकता है, यदि भारत की सप्लाई को रोका जाता है ।भारत को रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ की चेतावनी मिली, जिसके चलते सरकारी रिफाइनरियों ने तुरंत रूस से ठेके रोक दिए ।यदि रूस से तेल सप्लाई में कमी आती है, तो भारत के पास पर्याप्त अल्टरनेटिव विकल्प हैं: मध्य-पूर्व, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, और घरेलू उत्खनन। शुरुआत में कीमतों में वृद्धि और टैरिफ का असर होगा, लेकिन दिल्ली ने समय रहते विविधता सुनिश्चित की है। सरकार और तेल मंत्री दोनों ने भरोसा दिलाया है कि आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा रक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।

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