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शिक्षक संघ चुनाव में बवाल: मनमानी और परिवारवाद के आरोपों से गरमाई सियासत

हेमंत मोहन, पटना | 4 मई 2026 बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ (स्व. ब्रजनन्दन शर्मा गुट) में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर गंभीर विवाद उभर कर सामने आया है।…

May 4, 2026
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शिक्षक संघ चुनाव में बवाल: मनमानी और परिवारवाद के आरोपों से गरमाई सियासत

Photo: The Media Times / Representative Image

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The Media Times
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हेमंत मोहन, पटना | 4 मई 2026

बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ (स्व. ब्रजनन्दन शर्मा गुट) में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर गंभीर विवाद उभर कर सामने आया है। कार्यवाहक अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया पर उठे सवालों ने संगठन के भीतर गहरी असंतोष की स्थिति पैदा कर दी है। आरोप हैं कि पूरी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए मनमानी और परिवारवाद को बढ़ावा दिया गया।

संघ की नियमावली के अनुसार, अध्यक्ष पद रिक्त होने के बाद 1 मई 2026 को संघ भवन में राज्य कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त राम प्रवेश सिंह की अध्यक्षता में चुनाव प्रक्रिया संपन्न होनी थी। प्रारंभिक चर्चा के दौरान यह प्रस्ताव रखा गया कि एक त्रिस्तरीय समिति गठित कर सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद निर्णय प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।

हालांकि, समिति के गठन और उसकी भूमिका को लेकर कार्यसमिति के कई सदस्यों ने आपत्ति दर्ज कराई। बढ़ते विवाद के बीच बैठक की अध्यक्षता कर रहे वरीय उपाध्यक्ष राम अवतार पांडे ने स्पष्ट निर्देश दिया कि त्रिस्तरीय समिति सभी सदस्यों की राय लेकर सदन के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

इसके बावजूद आरोप है कि समिति ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया और मुख्य चुनाव आयुक्त की सहमति के बिना ही हरेंद्र प्रसाद राय को कार्यवाहक अध्यक्ष घोषित कर दिया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि बिना मतपत्र के ही यह दावा कर दिया गया कि किस उम्मीदवार को कितने मत मिले, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

वरीय उपाध्यक्ष राम अवतार पांडे ने इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि “संगठन में इस प्रकार की मनमानी न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के भी विपरीत है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया मुख्य चुनाव आयुक्त की निगरानी में ही संपन्न होनी चाहिए थी। पांडे ने त्रिस्तरीय समिति पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने और संगठन के हितों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पहले से ही परिवारवाद और बाहरी हस्तक्षेप के कारण संघ दो गुटों में विभाजित हो चुका है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे संवेदनशील समय में एकतरफा निर्णय लेना न केवल स्थिति को और जटिल बनाता है, बल्कि संगठन की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।

इस घटनाक्रम के बाद संघ के भीतर असंतोष और गहरा गया है। कई सदस्य खुलकर विरोध दर्ज कराने की तैयारी में हैं। जानकारों का मानना है कि यदि शीघ्र ही पारदर्शी और नियमसम्मत समाधान नहीं निकाला गया, तो यह विवाद आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है।

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