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स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप! वर्षों से जमे लिपिकों पर तबादले की तलवार, 2814 कर्मियों की सूची जारी होते ही शुरू हुआ ‘जुगाड़’ खेल

द मीडिया टाइम्स डेस्क पटना, 20 मई : स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से एक ही जगह कुंडली जमाये कर्मचारियों का तबादला होगा। विभाग ने 2814 लिपिकों की औपबंधिक वरीयता सूची…

May 20, 2026
2 min read
स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप! वर्षों से जमे लिपिकों पर तबादले की तलवार, 2814 कर्मियों की सूची जारी होते ही शुरू हुआ ‘जुगाड़’ खेल

Photo: The Media Times / Representative Image

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The Media Times
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द मीडिया टाइम्स डेस्क

पटना, 20 मई : स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से एक ही जगह कुंडली जमाये कर्मचारियों का तबादला होगा। विभाग ने 2814 लिपिकों की औपबंधिक वरीयता सूची जारी की है। इसके बाद विभागीय गलियारों में हड़कंप मच गया है। सबसे ज्यादा बेचैनी पटना जिले में देखी जा रही है, जहां 100 से अधिक लिपिकों के तबादले की चर्चा तेज है।

सूत्र बताते हैं कि सूची सामने आते ही कई कर्मी तबादला रुकवाने के लिए सक्रिय हो गए हैं। विभागीय संपर्क, राजनीतिक पहुंच और ‘सेटिंग-जुगाड़’ का खेल भी शुरू हो चुका है।

गृह जिले में वर्षों से जमे कर्मचारी

वरीयता सूची के विश्लेषण में खुलासा हुआ है कि बड़ी संख्या में लिपिक वर्षों से अपने गृह जिले में ही जमे हुए हैं। नियमों से बचने के लिए कई कर्मियों ने सिर्फ प्रखंड बदला, लेकिन जिला नहीं छोड़ा। इससे विभागीय तबादला नीति पर भी सवाल उठने लगे हैं।

दानापुर-खगौल पीएचसी सबसे ज्यादा चर्चा में : दानापुर-खगौल पीएचसी का मामला सबसे अधिक चर्चा में है। यहां चार से अधिक लिपिक लंबे समय से एक ही जगह कार्यरत बताए जा रहे हैं। सूची में कई ऐसे नाम भी सामने आए हैं, जिनकी कागजी पोस्टिंग और वास्तविक कार्यस्थल अलग-अलग हैं।

रिकॉर्ड में भी बड़ी गड़बड़ी : सूची में कई त्रुटियां भी उजागर हुई हैं। महिला लिपिक रीता देवी की जन्मतिथि 10 जून 2044 दर्ज कर दी गई है, जबकि नियुक्ति वर्ष 2007 दिखाया गया है। इस गलती ने विभागीय रिकॉर्ड व्यवस्था की पोल खोल दी है।

वहीं संजय कुमार कंचन की पोस्टिंग सूची में एपीएचसी सरारी गुमटी दिखाई गई है, लेकिन सूत्र उन्हें दानापुर पीएचसी में कार्यरत बता रहे हैं।

अब सबकी नजर विभाग पर

सूची जारी होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में एक ही सवाल सबके जुबां पर है—क्या इस बार वास्तव में वर्षों से जमे कर्मियों पर कार्रवाई होगी या फिर पहले की तरह नियम फाइलों में ही दबकर रह जाएंगे। यहां यह बता दें कि अगले माह से लिपिकों की ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। अब स्वास्थ मंत्री निशांत कुमार व सचिव रवि कुमार की तरफ लोगों की निगाहें हैं।

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