पटना, 23 जनवरी। बसंत पंचमी के अवसर पर शुक्रवार को बिहार की राजधानी पटना में स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ सरस्वती पूजा का आयोजन किया। इस पर्व के साथ ही वसंत ऋतु के आगमन का भी उत्सव मनाया गया। शिक्षण संस्थानों में सुबह से ही पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक गतिविधियों का दौर शुरू हो गया।
पीले और चमकीले रंगों के वस्त्रों में सजे छात्र-छात्राओं ने विद्या की देवी मां सरस्वती की प्रतिमाओं के समक्ष पूजा-अर्चना की। छात्रों ने ज्ञान, बुद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए देवी से आशीर्वाद मांगा। पूजा के बाद प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र और शिक्षक शामिल हुए।
पटना के कई प्रतिष्ठित स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों द्वारा स्वयं सरस्वती पूजा पंडालों की सजावट की गई। फूलों, रंग-बिरंगी लाइटों और शैक्षणिक प्रतीकों से सजे पंडालों ने पूरे परिसर को भक्तिमय वातावरण में बदल दिया। कई संस्थानों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन, संगीत और श्लोक पाठ का भी आयोजन किया गया।
छात्रों का कहना है कि सरस्वती पूजा न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि यह शिक्षा और संस्कारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। इस दिन विशेष रूप से विद्यार्थी अपने अध्ययन, परीक्षा और करियर को लेकर मां सरस्वती से मार्गदर्शन की प्रार्थना करते हैं।
शिक्षकों और कॉलेज प्रशासन ने भी पूजा में भाग लेते हुए छात्रों का उत्साह बढ़ाया। कई जगहों पर शिक्षकों ने छात्रों को बसंत पंचमी के महत्व के बारे में बताया और इसे ज्ञान, अनुशासन और रचनात्मकता से जोड़कर समझाया। कुछ संस्थानों में इस अवसर पर पुस्तकें, कलम और कॉपियों की भी पूजा की गई।
सरस्वती पूजा उत्तर भारत में व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व है। इसे विद्या, कला, संगीत और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है, जो समृद्धि, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है।
पटना में सरस्वती पूजा को लेकर छात्रों में खासा उत्साह देखने को मिला। पूरे शहर में शिक्षण संस्थानों के आसपास भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक भावना को मजबूत किया, बल्कि छात्रों के बीच आपसी सहयोग और सांस्कृतिक एकता को भी बढ़ावा दिया।




