लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को लेकर अब उनकी पत्नी गीतांजलि सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। गीतांजलि ने अपनी याचिका में कहा है कि उनके पति पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाना पूरी तरह से अनुचित और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
गीतांजलि का कहना है कि वांगचुक का आंदोलन शांतिपूर्ण था और वह केवल लद्दाख की जनता की आवाज़ को लोकतांत्रिक तरीके से सामने ला रहे थे। ऐसे में उन पर देश की सुरक्षा से जुड़ा कड़ा कानून थोपना न्यायसंगत नहीं है।
क्या है मामला?
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को छठा अनुसूची (Sixth Schedule) का दर्जा दिलाने और क्षेत्र की पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं। हाल ही में उनकी ओर से आयोजित विरोध प्रदर्शन और उपवास आंदोलन ने प्रशासन को कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया, जिसके बाद उन पर NSA लगाया गया।
विपक्ष और नागरिक संगठनों की प्रतिक्रिया
वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद से ही विपक्षी दलों और कई नागरिक संगठनों ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण आंदोलनकारी पर ऐसे सख्त कानून का इस्तेमाल लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई से यह तय होगा कि वांगचुक पर लगा NSA बरकरार रहेगा या हटाया जाएगा। इस मामले ने न केवल लद्दाख बल्कि पूरे देश में नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता पर बहस को तेज कर दिया है।




