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म्यांमा में तख्तापलट के पांच साल बाद भी राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संकट बरकरार

एडिलेड (आस्ट्रेलिया), 28 जनवरी  म्यांमा में वर्ष 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट को पांच साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद देश की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं…

Jan 28, 2026
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म्यांमा में तख्तापलट के पांच साल बाद भी राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संकट बरकरार

Photo: The Media Times / Representative Image

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एडिलेड (आस्ट्रेलिया), 28 जनवरी  म्यांमा में वर्ष 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट को पांच साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद देश की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो पाया है। आज भी म्यांमा गंभीर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझ रहा है। सेना द्वारा लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर सत्ता संभालने के बाद से देश लगातार अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है।

तख्तापलट के बाद देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए, जिन्हें सैन्य शासन ने बल प्रयोग कर दबाने की कोशिश की। हजारों नागरिकों को गिरफ्तार किया गया, जबकि सैकड़ों लोगों की जान चली गई। इस दमनात्मक नीति के कारण जनता और सेना के बीच अविश्वास और गहरा हो गया, जिससे राजनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ती चली गईं।

राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर म्यांमा की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। विदेशी निवेश में भारी गिरावट आई है और कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने देश छोड़ दिया है। पर्यटन उद्योग लगभग ठप हो चुका है, जबकि व्यापार और निर्यात भी प्रभावित हुए हैं। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा अवमूल्यन ने आम नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

सामाजिक स्तर पर भी हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। लाखों लोग आंतरिक विस्थापन का शिकार हुए हैं और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर होना पड़ा है। स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई अस्पतालों और स्कूलों में पर्याप्त संसाधनों की कमी है, जिससे बच्चों और मरीजों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, म्यांमा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मीडिया की आजादी और नागरिक अधिकारों पर लगातार अंकुश लगाया जा रहा है। पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने म्यांमा की स्थिति पर चिंता जताई है और कई देशों ने सैन्य सरकार पर प्रतिबंध भी लगाए हैं। हालांकि, इन प्रयासों का अब तक सीमित असर ही देखने को मिला है। पड़ोसी देशों और क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका भी अब तक निर्णायक साबित नहीं हो सकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक म्यांमा में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल नहीं होती और सभी पक्षों के बीच संवाद स्थापित नहीं होता, तब तक संकट का समाधान संभव नहीं है। वर्तमान हालात यह दर्शाते हैं कि देश को स्थिरता की राह पर लौटने के लिए अभी लंबा सफर तय करना होगा।

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