द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटन, 27 मई : एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ उठ रहे हर सवालों का सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जवाब दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह से वैध है और यह संविधान की कसौटी पर भी खरी उतरती है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर कराने की वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर फैसला सुना दिया है। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि एसआईआर कराना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। साथ ही ये भी कहा कि देश में मुक्त और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए सांविधानिक अनिवार्यता की शर्त को भी एसआईआर पूरा करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर कराना पूरी तरह से वैध है और यह आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324, लोक प्रतिनिधित्व कानून 1950 में चुनाव आयोग को एसआईआर कराने की शक्ति दी गई है। ऐसे में ये नहीं कह सकते कि चुनाव आयोग ने अपनी वैधानिक शक्तियों के बाहर जाकर एसआईआर कराया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के पास शक्ति है कि वे मतदाता सूची के उद्देश्य के लिए नागरिकता की भी जांच कर सकता है। हालांकि ये अधिकार सिर्फ मतदाता सूची संशोधन तक सीमित है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 16 के तहत चुनाव आयोग को यह अधिकार दिया गया है। अदालत ने ये भी साफ किया कि अगर आयोग को लगता है कि कोई व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने की वैधानिक शर्तें पूरी नहीं करता है तो आयोग उस व्यक्ति को सक्षम प्राधिकारी के पास भेज सकता है। मतदाता सूची से कोई भी नाम हटाना सक्षम प्राधिकारी द्वारा किए गए फैसले पर निर्भर होगा। कोर्ट ने अपने फैसले में एक अहम बात कही। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान की तकनीकी व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका आधार मतदाता सूची की शुद्धता, सटीकता और विश्वसनीयता भी है। कोर्ट ने माना कि एसआईआर का उद्देश्य इसी आधारभूत अखंडता को सुरक्षित करना है और यह मुक्त और निष्पक्ष चुनाव कराने की सांविधानिक अनिवार्यता को भी मजबूत करता है।




