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पटना के स्वास्थ्य केंद्रों में सीएस के आदेश की खुली अवहेलना, CCTV नहीं तो हादसों की जिम्मेदारी किसकी?

द मीडिया टाइम्स डेस्क पटना, 16 मई : जिला स्वास्थ्य समिति पटना के सख्त निर्देशों के बावजूद राजधानी के कई सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में अब तक CCTV कैमरे नहीं लगाए…

May 16, 2026
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पटना के स्वास्थ्य केंद्रों में सीएस के आदेश की खुली अवहेलना, CCTV नहीं तो हादसों की जिम्मेदारी किसकी?

Photo: The Media Times / Representative Image

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The Media Times
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द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 16 मई : जिला स्वास्थ्य समिति पटना के सख्त निर्देशों के बावजूद राजधानी के कई सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में अब तक CCTV कैमरे नहीं लगाए गए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सिविल सर्जन के आदेश को ठेंगा दिखा रहे हैं?
7 मार्च 2026 को जारी पत्र में सिविल सर्जन डॉ. वाईपी मंडल ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि जिन संस्थानों में CCTV कैमरा नहीं होगा, वहां किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रभारी की होगी। इसके बावजूद राजेंद्र नगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और गर्दनीबाग अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में मई का दूसरा सप्ताह बीत जाने के बाद भी कैमरे नहीं लगाए जा सके हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्वास्थ्य विभाग सुरक्षा और पारदर्शिता की बात करता है, तो फिर अस्पतालों में निगरानी व्यवस्था क्यों नहीं है? आखिर किस बात का इंतजार किया जा रहा है — किसी और बड़े हादसे का?
गौरतलब है कि 11 मार्च को गर्दनीबाग अस्पताल में डिलीवरी के दौरान एक नवजात की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया था। परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही की जांच के लिए CCTV फुटेज की मांग की थी, लेकिन अस्पताल में कैमरा ही नहीं था। उस समय अस्पताल प्रशासन को भारी किरकिरी झेलनी पड़ी थी। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं चेते।
सूत्र बताते हैं कि कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के निरीक्षण में कई स्वास्थ्य संस्थान CCTV मॉनिटरिंग सूची से ही गायब पाए गए। इसे लेकर सीएस ने नाराजगी जताई थी और तत्काल कैमरा लगाने का निर्देश दिया था। लेकिन विभागीय उदासीनता और अधिकारियों की मनमानी के कारण आदेश फाइलों तक सीमित होकर रह गया।
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि भविष्य में किसी अस्पताल में मरीज की मौत, मारपीट, हंगामा या चिकित्सकीय लापरवाही का मामला सामने आता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या स्वास्थ्य विभाग केवल पत्र जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है?
स्वास्थ्य विभाग के अंदरखाने में चर्चा है कि कई अधिकारी जानबूझकर आदेशों को नजरअंदाज कर रहे हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे रह जाएगी।

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