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सीएम के गमछा पॉलिटिक्स से सियासी तूफान, रोहिणी आचार्या का पलटवार, बोली – रंग और पहनावे को अपराध से जोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ

द मीडिया टाइम्स डेस्क पटना, 24 मई : बिहार की राजनीति में एक बार फिर गमछा पॉलिटिक्स को लेकर घमासान तेज हो गया है। पटना के ऊर्जा भवन में आयोजित…

May 24, 2026
2 min read
सीएम के गमछा पॉलिटिक्स से सियासी तूफान, रोहिणी आचार्या का पलटवार, बोली – रंग और पहनावे को अपराध से जोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ

Photo: The Media Times / Representative Image

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The Media Times
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द मीडिया टाइम्स डेस्क

पटना, 24 मई : बिहार की राजनीति में एक बार फिर गमछा पॉलिटिक्स को लेकर घमासान तेज हो गया है। पटना के ऊर्जा भवन में आयोजित एआई समिट के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री ने एआई तकनीक और निगरानी व्यवस्था का ज़िक्र करते हुए कहा कि राजधानी पटना में करीब चार हजार एआई कैमरे लगाए गए हैं और यदि एआई सिस्टम को यह निर्देश दिया जाए कि हरे गमछा पहनने वालों को पहचानना है, तो वह तुरंत उन्हें चिन्हित कर कार्रवाई तक कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इशारा किसी विशेष वर्ग या समुदाय की ओर नहीं था।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष हमलावर हो गया। राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने भगवा गमछा का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था के नाम पर किसी रंग, पहचान या पहनावे को अपराध से जोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

रोहिणी आचार्या ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि राज्य में असली अपराधियों पर कार्रवाई करने के बजाय राजनीतिक विरोधियों को डराने और निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अपराध और माफिया को किसी एक रंग या पहचान से जोड़कर देखना गलत मानसिकता को दर्शाता है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान को पूर्वाग्रह से प्रेरित और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि बिहार की जनता इस तरह की राजनीति का जवाब देगी।

इस पूरे विवाद के बाद सोशल मीडिया पर बहस और भी तेज हो गई है। समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष लगातार अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग इसे केवल राजनीतिक बयानबाज़ी बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं।वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री का बयान पूरी तरह तकनीक, सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर था और उसका उद्देश्य किसी समुदाय, दल या वर्ग को निशाना बनाना नहीं था। फिलहाल गमछा विवाद बिहार की राजनीति में नया सियासी मुद्दा बन चुका है और इसको लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच बयानों की जंग लगातार तेज होती जा रही है।

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