दी मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना/मुंगेर, 21 मई : स्वास्थ्य विभाग की ओर से लिपिकीय सेवा संवर्ग के 2814 लिपिकों की औपबंधिक वरीयता सूची जारी किये जाने के बाद मुंगेर जिले में हलचल तेज हो गई है। सूची सार्वजनिक होते ही स्वास्थ्य विभाग के कार्यालयों में तबादले को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो इस सूची के आधार पर मुंगेर जिले के 50 से अधिक लिपिकों का तबादला संभावित माना जा रहा है। इसी आशंका के बीच कई कर्मचारी अपने स्तर से तबादला रुकवाने की कोशिशों में जुट गये हैं।
सूची के अध्ययन में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं। बताया जा रहा है कि जिले में कार्यरत करीब 100 लिपिकों में कई ऐसे हैं, जो वर्षों से मुंगेर में ही पदस्थापित हैं। कुछ कर्मियों ने नियमों के दायरे से बचने के लिए केवल एक प्रखंड से दूसरे प्रखंड में स्थानांतरण कराकर अपने गृह जिले में ही सेवा जारी रखी। इससे विभागीय तबादला नीति के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
सबसे अधिक चर्चा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धरहरा को लेकर हो रही है। जानकारी के अनुसार, यहां छह से अधिक लिपिक लंबे समय से जमे हुए हैं। वरीयता सूची से यह भी स्पष्ट हुआ है कि लगभग 41 लिपिक ऐसे हैं, जिनकी पूरी सेवा अवधि मुंगेर जिले के विभिन्न कार्यालयों तक ही सीमित रही है। ऐसे में अब विभाग द्वारा बड़े स्तर पर तबादला किये जाने की संभावना जताई जा रही है।
औपबंधिक वरीयता सूची में कई तकनीकी और प्रशासनिक खामियां भी सामने आई हैं। क्रम संख्या 278 पर दर्ज गीता कुमारी की जन्मतिथि 23 अप्रैल 1975, नियुक्ति तिथि 1 दिसंबर 1993 तथा सेवानिवृत्ति तिथि 30 अप्रैल 2035 अंकित है, लेकिन उनके वर्तमान कार्यस्थल का उल्लेख नहीं किया गया है। इससे सूची की सटीकता पर सवाल उठ रहे हैं।
इसी तरह क्रम संख्या 1894 पर दर्ज चंदन कुमार के नाम के सामने कार्यस्थल के कॉलम में केवल “अर्बन” लिख दिया गया है। उनकी जन्मतिथि 16 अप्रैल 1997 और नियुक्ति तिथि 8 फरवरी 2016 दर्ज है, लेकिन स्पष्ट पदस्थापन विवरण नहीं होने से कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
धरहरा प्रखंड से जुड़े लिपिकों की सूची में भी विसंगति देखने को मिली है। क्रम संख्या 1511 और 1512 पर क्रमशः नंदनी कुमारी और सुबोध कुमार का नाम दर्ज है, जिसे लेकर विभागीय हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि सूची तैयार करने या उसे विभाग को भेजने में जिला स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती गई है।
स्वास्थ्य विभाग की वरीयता सूची ने एक ओर जहां लंबे समय से जमे कर्मियों में बेचैनी बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर सूची में सामने आई त्रुटियों ने विभागीय कार्यप्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इन आपत्तियों और विसंगतियों पर क्या कार्रवाई करता है।
अब चर्चा है कि जून में प्रस्तावित ट्रांसफर में किस किस लिपिक पर तलावार गिरती है।

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